विश्व मानव रूहानी केंद्र एक धर्मार्थ संस्था है जिसका मुख्यालय नवानगर, जिला पंचकूला, राज्य हरियाणा (बद्दी के बिल्कुल पास) है।
हमारी इस संस्था के प्रमुख परम संत बलजीत सिंह महाराज जी की कृपा से पूरे भारत देश में इस बार लगभग 61 कावड़ शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
हमारा यह कांवड़ शिविर, शांति नगर आश्रम, गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के माध्यम से उक्त धर्मार्थ संस्था के द्वारा पिछले छः सात वर्षों से लगातार तथा सतगुरु देव पिता बलजीत सिंह जी की कृपा से, मेरठ रोड पर शिब्बनपुरा (घूकना मोड़ के सामने) गाजियाबाद पर लगता है। इस बार भी यह कांवड़ शिविर दिनांक 17 जुलाई 2025 से दिनांक 23 जुलाई 2025 तक के लिए लगाया है।
जिसमें कांवड़ियों को निम्न प्रकार की सेवाएं दी जा रही है जिसमें मुख्य सेवायें निम्न प्रकार है :-

  • शिव भक्त महिला कांवड़िया और पुरुष कांवड़िया दोनों को अलग अलग मोबाइल चार्जिंग की सुविधा दी जा रही है।
  • शिव भक्तों को स्वच्छ और आरोग्य निशुल्क जलपान, लंगर प्रसाद और व्रत वाले कांवड़ियों को फलाहार प्रदान किया जाता है।
  • महिला एवं पुरुष कांवड़ियों को अलग-अलग विश्राम स्थल एवं शौचालय की निशुल्क सेवा प्रदान की जा रही है।
  • कांवड़ियों की कावड़ को हमारे सुरक्षा गार्ड तथा सेवादारों के द्वारा निशुल्क सुरक्षा प्रदान की जाती है।
  • कावड़ शिविर को कैमरों के द्वारा निगरानी में रखा गया है और पूरे कैंप को शोर मुक्त तथा धूम्रपान रहित किया गया है और उक्त सभी सेवाएं प्रदान की जा रही है।
  • आज दिनांक 21 जुलाई को शाम तक लगभग 3000 के भक्तों को उक्त वर्णित सुविधा निशुल्क प्रदान की जा चुकी हैं और 1250 कावड़ियों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा चुकी है।
  • कावड़ शिविर के अतिरिक्त हमारी उक्त संस्था मानव जाति और जरूरतमंद लोगों को चिकित्सीय सेवाएं तथा खान-पान की सेवाएं प्रदान करती है जिसकी अधिक जानकारी हेतु संस्था की अधिकृत वेबसाइट www.v.mrk.in पर देखी जा सकती है।
  • अधिकृत यूट्यूब चैनल नमामि शमीशान निर्वाण रूपम भी है।
    हमारी संस्था के प्रमुख संत बलजीत सिंह जी के आध्यात्मिक प्रवचनों के द्वारा, समस्त मानव जाति के कल्याण हेतु समय-समय पर आवश्यक उपदेश दिए जाते रहते हैं। संसार में सबका कल्याण हो और मानव के प्रति निस्वार्थ प्रेम के साथ, झूठ और छल कपट के बिना जीवन जीएं और समस्त जीवों के प्रति करूणा और दयाभाव भी बनाए रखें।
    गुरबाणी में कहा गया है कि :-
    गुरु बिन घोर अंधार, गुरु बिन समझ ना आवे।
    गुरु बिन सुरत ना सिद्ध, गुरु बिन मुक्त ना पावे।।

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